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praveengugnani


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निहितार्थों का समुद्र

Posted On: 23 Oct, 2012  
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ईश्वर का अंश लिए आँखें चिड़िया की

Posted On: 19 Oct, 2012  
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शब्दों पर क्यों नहीं उगाए पुष्पों के पौधे?

Posted On: 15 Oct, 2012  
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जो गीत कह चुका उसे भी न भूल जाओं

Posted On: 8 Oct, 2012  
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Posted On: 8 Oct, 2012  
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Hello world!

Posted On: 6 Oct, 2012  
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अपलक देखतें सपनें

Posted On: 6 Oct, 2012  
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7 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

जय श्री राम प्रवीण जी आपके इस सुन्दर मर्मस्पर्शी लेख की बड़ाई के लिए हमारे पास शब्द नहीं फारुक अब्दुला ने दिखा दिया की वे पहले मुसलमान और फिट भारती लेकिन गलती केंद्र की सरकार की है जिसको फारुक सरकार को बर्खास्त करके राष्ट्रपति शाशन लगा देना चाइये था.विश्व नाथ प्रताप सिंह की गलती जिन्होंने जग मोहन को राज्यपाल से हटा लिया नहीं तो शय हालत ऐसे नहीं होते दादरी की एक घटना पर तूफ़ान उठाने वाले इस असवेदना पर चुप येमुस्लिम तुष्टीकरण की नीति है न कोइ असहिष्णुता की आवाज़ न कोइ अवार्ड वापसी न ही मानव्दीकार न ही संयुक्त राष्ट्र संघ यदि मुसलमानों के साथ होता तो पुरे देश में भूकंप आ जाता.हमारे हिसाब से हफ्ते का सबसे बढ़िया लेख.बधाई और साधुवाद

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: praveengugnani praveengugnani

के द्वारा: praveengugnani praveengugnani

के द्वारा: jklm jklm

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: Sumit Sangwan Sumit Sangwan

के द्वारा: Rajesh Kumar Srivastav Rajesh Kumar Srivastav

के द्वारा: shalinikaushik shalinikaushik

आदरणीय प्रवीण जी, नमस्कार बात हिन्दू विचारधारा की नहीं बल्कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति एवं अपना उम्मीदवार स्वयं चुनने के अधिकार का है . यदि बड़े से बड़े घोटालेबाज नेता अथवा भ्रष्ट से भ्रष्ट पब्लिक फिगर अपनी और से किसी को प्रधानमन्त्री पद का सच्चा दावेदार मान सकते हैं तो संत समाज क्यूँ नहीं . क्या उनके विरुद्ध बिना वजह प्रलाप करना कानून के अनुसार अपराध नहीं है ? क्या उनको अपना मत प्रगट करने से रोकना मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं है ? लानत है ऐसी सोंच पर जो एक व्यक्ति के नागरिक अधिकारों पर भी पाबंदी लगाने के लिए उद्धत है . गणतंत्र में जितना अधिकार शिवानंद जी को मिली है उतना संत समाज को भी . संत समाज ने तो अनेक बार भारतवर्ष को सही राह दिखाया है किन्तु इन्होने ने तो ब्राह्मणत्व को बारम्बार लज्जित किया है और यह सिद्ध किया है कि विदेशी आक्रमणकारियों के प्रभाव से जो जन्म के अनुसार जातिगत ढांचा बना है वो समाज के लिए कितना घातक है . ब्राह्मण केवल वही हो सकता है जो सामाजिक हित में अपना बलिदान कर दे न कि वो जो समाज को गलत दिशा दिखाकर उसे दिग्भ्रमित करे . अच्छे पोस्ट के लिए बधाई .

के द्वारा: baijnathpandey baijnathpandey

आज देश की राजनितिक दलों में केवल प्रधानमंत्री कौन बने? इसी बात की चर्चा का होना कतई जनहित और देश हित में नहीं क्यूंकि इन चर्चाओं का देश की राजनीती एवं देश के नेताओं पर कोई असर नहीं डालता यह महज चर्चा परिचर्चा का विषय बनकर रह जाता है क्यूंकि आज जो नेता चाहे वह सत्ता पर काबिज हो या विपक्ष में झुठमुठ का बयान देता है कुछ करता दिखाई दे रहा हो ऐसा नहीं है ,उसको जनता से कोई सरोकार नहीं चाहे जनता अल्पसंख्यक समुदाय की हो या बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय से हो इन नेताओं को आज जनता से कोई सरोकार नहीं और आज जिस तरह से इस देश की जनता महंगाई ,भ्रष्टाचार ,न्याय मिलने में देरी ,पुलिस का ब्यवहार और न जाने कितनी बुनियादी सुविधाएँ ,जरूरतें ऐसी जन समस्यायों सेजूझ रही है उन समस्यायों से लोगों का ध्यान हटाने के सिवा और कोई काम ये नेता करते नहीं दिखाई देते जैसे चुनाव का वख्त नजदीक आता है सत्ता पक्ष तरह तरह की जन कल्याण की योजनाओं की घोषणा कारन शुरू कर देती है बेशक चुनाव आयोग जितना मर्जी इन पर चुनाव आचार सहिता के उल्लघन का आरोप लगाता रहे ये नेता वही करते हैं जो इनके मन को भाता है क्यूंकि चुनाव आयोग भी इनका, न्यायायलय भी इनका, पुलिस भी इनकी, सी बी आई भी इनकी. फिर ऐसे में जिस जनतंत्र की दुहाई ये नेता दे रहें हैं आपको क्या लगता है? क्या? नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बन जायेंगे तो सी बी आई को स्वतन्त्र कर देंगे एक मजबूत जनलोकपाल बिल लागु कर देंगे क्या कानून का राज स्थापित हो जायेगा क्या गुंडे इस देश में मंत्री पद पर नहीं रहंगे सांसद नहीं बनेंगे आपके विचार इस पर भी मैं जानना चाहूँगा वैसे श्री शिवानन्द तिवारी के विषय में आपने जितना कुछ लिखा है उससे कहीं ज्यादा मैं आपको उनके बारे में बता सकता हूँ क्यूंकि मुझे कभी उनके बहुत करीब रहने का अवसर मिला है और मैं बिहार का ही रहने वाला हूँ आज से चंद साल पहले वे महान नेता श्री लालू प्रसाद यादव जी के चरण कमलों में मथ्था टेकते नजर आये थे और आज बिहार के मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार की चरण वंदना कर रहें हैं और उसी चाटुकारिता के तहत संतों की वाणी का इस तरह अनादर कर रहें हैं दुर्भाग्य से वे भी ब्राह्मण परिवार के सदस्य हैं और इनके पिताश्री दिवंगत रामानानद तिवारी एक जुझारू और इमानदार नेता थे शिवानन्द भाई में ऐसा कोई गुण नहीं अतः मैं उनके बयान के बारे में ज्यादा कुछ नहीं लिखूंगा केवल इतना जरुर कहूँगा जिस नितीश कुमार ने उनको राजसभा में भेजा है भला उनकी चाटुकारिता करनेमें उनको खुश रखने में ये कैसे पीछे हटते और नितीश भी तो प्रधानमंत्री बनने के लिए आतुर हैं हालाँकि उनको अच्छी तरह पता है वे बिहार में बीजेपी के समर्थन से हीं सरकार चला रहें हैं लेकिन बीजेपी को सांप्रदायिक कहने का कोई मौका ये हाथ से जाने देना नहीं चाहते. इस देश में काबिज कांग्रेस की सरकार जो आज सत्ता में है जो मुस्लिम अपराधी को भी फांसी नहीं देने की वकालत करती है उसको हीं इस देश में सेकुलर कहा जाता है बाकि सभी सांप्रदायिक हैं यह कांग्रेस एवं अन्य पार्टियों का देश की जनता को बांटे रखने की साजिश है हालाँकि इनमे से कोई भी पार्टी अल्पसंख्यक समुदाय का कुछ भला करने वाली नहीं पर उनका वोट पाने के लिए ऐसे तिकड़म का इस्तेमाल जरुर करते हैं और इस देश के बहुसंख्यक हिन्दू पूरी संख्या में वोट देने जाते ही नहीं हैं क्यूंकि वे तो रामायण की चौपाई को याद करते हैं जिसमे बहुत वर्ष पहले लिखा गया है "कोउ नृप होहिं हमें का हानि चेरी छाडी होयिबो ना रानी " अतः प्रधानमंत्री कोई बने यहाँ राज काज हमेशा से पूंजीपतियों के हाथ रहता है और रहेगा एक बामपंथी पूंजीपतियों का विरोध करते थे अब वे भी मलाई खाने लगे हैं क्यूंकि चुनाव जीतने के लिए पैसा चाहिए और पैसा इनको पूँजी पति हीं उपलब्ध करते रहें हैं अतः किसी बदलाव की सोचना मूर्खता होगी चाहे पी एम् मोदी बने या और कोई हाँ उनके पीएम बनने से सेकुलर की परिभाषा जरुर बदलेगी

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: nishamittal nishamittal

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: praveengugnani praveengugnani

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के द्वारा: praveengugnani praveengugnani




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