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आज जब बादल छाए

Posted On: 9 Jun, 2013 Others में

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आज जब बादल छाए                                                                                                                                                            (१)

कैसे होगा बादल कभी और नीचे

और बरस जायेगा ,

फुहारों और छोटी बड़ी बूंदों के बीच

मैं याद करूँगा तुम्हे

और तुम भी बरस जाना .

.(२)……………………………………………..

कुछ बूंदों पर लिखी थी तुम्हारी यादें

जो अब बरस रही है ,

सहेज कर रखी इन बूंदों पर से

नहीं धुली तुम्हारी स्मृतियाँ

न ही नमी भी आई उन पर ,

यादें तुम्हारी अब भी

उष्णता और उर्जा को लिये बहती है

और मैं उसमे नाव चला लेता हूँ .

(३)…………………………………………

बरसात अभी कहीं होने को है ,

हवा बता रही है .

यह भी पता चला है

कि

तुमने गूंथी हुई चोटी खोल ली है

तुम्हारी .

(४)……………………………………………

भूमि अभी कड़क है

नहीं  पड़ रहे पैरों के निशान अभी .

कि

इसलिए ही तुम अभी कहीं न जाना ,

मुझे आना है

इस बार वर्षा में तुम्हारे पीछे .

(५)………………………………………………..

नहीं होती है उतनी अप्रतिम ज्ञान कि अभिलाषा भी

कि जितनी पहली वर्षा की बूंदों की चिंता .

मेरी प्रज्ञा में

डूबते उतरती  तुम्हारी गंध

बसी ही होंगी अबके बारिश कि बूंदों में .

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
June 12, 2013

सुन्दर रचना / बधाई /

shalinikaushik के द्वारा
June 9, 2013

sundar bhavon ko sanjoye .


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